Chhath Puja 2025 : छठ पूजा में संध्या अर्घ्य के समय ना करें यह गलतियां, वरना छठी माता हो जाएगी नाराज

Chhath Puja 2025 : छठ पूजा 2025 की शुरुआत हो चुकी है इस समय बिहार झारखंड सहित कई राज्यों में पूरी आस्था के साथ छठ पर्व मनाया जा रहा है। छठ पूजा भगवान सूर्य देव और छठी माता को समर्पित है। चार दिन चलने वाले छठ पूजा का आज तीसरा दिन है और आज संध्या काल में सभी माता को संध्या अर्घ्य के समय भूलकर कुछ गलतियां नहीं करनी चाहिए वर्ना इससे छठी माता नाराज हो जाती है। आपको छठ पूजा के दौरान किन नियम का पालन करना चाहिए इसके बारे में जानते हैं।

संध्या अर्घ्य देते समय भूलकर ना करें यह पांच गलतियां

छठ पूजा का तीसरा दिन है आज शाम के वक्त डूबते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाएगा। सूर्य अर्घ्य देते समय आपको किन पांच गलतियां से बचना चाहिए इसके बारे में जानते हैं –

  • छठ पूजा के तीसरे दिन सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक आपको अन्य ग्रहण सेवन नहीं करना है और ना ही आपको एक बूंद जल पीना है।
  • छठी मैया का प्रसाद बनाते समय आपको सफाई का विशेष ध्यान देना है कोई भी प्रसाद छूने से पहले आपके हाथ को धोना जरूरी है।
  • प्रसाद बनाते समय यह किसी पूजा सामग्री को छूट समय आपको पवित्रता का विशेष ध्यान देना है इस समय आपको बिना स्नान किया या फिर अपवित्र हाथों से न छुए और ना ही चप्पल पहनकर आप कोई भी पूजा सामग्री और प्रसाद छुये।
  • सभी माता बहनों को व्रत के दौरान मन को सात्विक और शांत रखना है किसी के बारे में दुर्व्यवहार ना ही सोचना है और ना ही करना है।
  • छठी मैया व्रत के दौरान आपको ना तो किसी पर क्रोध करना है ना किसी को आप शब्द कहना है और ना ही किसी से लड़ाई झगड़ा करना है ऐसा करना पूरी तरह से मनाही है।

संध्या अर्घ्य देते समय क्या करना चाहिए ?

  • सभी माता बहनों को सूर्यास्त से कुछ समय पहले सभी पूजा सामग्री इकट्ठा करके पवित्र नदी या घर के पास बनाए गए जल कुंड के पास पहुंचे।
  • संध्या अर्ध देते समय केवल शुद्ध वस्त्र और पारंपरिक कपड़े धारण करें।
  • सभी माता बहनो को सारा दिन पवित्रता का विशेष ध्यान रखना है।
  • सभी माता बहनों को वृत्ति सुप को अपने हाथ में लेकर या किसी व्यक्ति के मदद से दूध और गंगाजल से अर्घ्य दें। इस समय आपको ध्यान देना है कि अर्घ्य देते समय धारा सूर्य की ओर होनी चाहिए।
  • सूर्य देव को अर्थ देते समय आपको ध्यान देना चाहिए कि जल की धारा के बीच में सूर्य की किरणें दिखाई देनी चाहिए और इस समय आप वैदिक मंत्र का जाप करें।
  • सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद आप शुभ में रखे गए घी का दीपक को जलाकर पवित्र नदी में प्रवाहित करें या फिर आप घाट पर किनारे रख दें।
  • अब आपको नदी किनारे बैठकर परिवार के बुजुर्ग या फिर किसी पंडित से छठ व्रत की कथा सुनी और इसके बाद आप छठी मैया से हाथ जोड़कर संतान की दीर्घायु सुख समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।

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