Amavasya Kab Hai : हमारे सनातन धर्म में प्रत्येक महीने बहुत सारे व्रत एवं त्योहार मनाए जाते हैं। इन व्रत त्यौहार में से अमावस्या व्रत बहुत ही विशेष महत्व रखता है। अमावस्या तिथि के दिन पवित्र नदी जैसे की गंगा जमुना में स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और इस दिन पूरे विधि विधान के साथ भगवान शिव जी और भगवान विष्णु जी की पूजा करने से जीवन की सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है। अगर आपके मन में फरवरी में पढ़ने वाली अमावस्या तिथि को लेकर किसी भी तरह की असमंजस की स्थित है तो हम आपके यहां पर बताएंगे कि फरवरी में अमावस्या कब है ( Amavasya Kab Hai ) और इसके साथ हम आपको अमावस्या तिथि से जुड़ी शुभ मुहूर्त एवं टाइमिंग पूजा विधि से भी जुड़ी सभी जानकारी देंगे।
फरवरी में अमावस्या कब है ( Amavasya Kab Hai )
फरवरी में पढ़ने वाली अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 फरवरी 2026 को शाम 5:34 पर शुरू होगी और इसका समापन अगले दिन 17 फरवरी 2026 को सुबह 5:30 पर होगा। उदय तिथि के हिसाब से अमावस्या तिथि का व्रत 17 फरवरी 2026 को रखा जाएगा और इस दिन पूरी विधि विधान के साथ भगवान श्री विष्णु और माता लक्ष्मी जी के साथ-साथ भगवान भोलेनाथ की भी पूजा की जाएगी।
फागुन अमावस्या शुभ मुहूर्त
| शुभ कार्य / मुहूर्त | समय (Timing) | विवरण |
|---|---|---|
| अमावस्या तिथि प्रारंभ | 16 फरवरी 2026, शाम 05:34 बजे | अमावस्या तिथि शुरू |
| अमावस्या तिथि समाप्त | 17 फरवरी 2026, शाम 05:30 बजे | तिथि समाप्त |
| मुख्य पूजा समय | 17 फरवरी, सुबह 06:30 – 11:30 बजे | पूजा, व्रत और स्नान का श्रेष्ठ समय |
| पितृ तर्पण मुहूर्त | सुबह 07:00 – 10:00 बजे | पितरों को जल अर्पण के लिए उत्तम |
| दान-पुण्य मुहूर्त | सुबह 08:00 – दोपहर 12:00 बजे | दान करना बहुत शुभ |
| पीपल दीपदान समय | शाम 06:00 – 07:30 बजे | दीपक जलाने का शुभ समय |
| शुभ ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 05:00 – 06:00 बजे | स्नान और संकल्प के लिए सर्वोत्तम |
| राहुकाल (अशुभ समय) | दोपहर 03:00 – 04:30 बजे | इस समय पूजा न करें |
फागुन अमावस्या का महत्व?
सनातन धर्म में फागुन अमावस्या तिथि का बहुत ही विशेष महत्व माना जाता है। फागुन अमावस्या तिथि के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार फागुन अमावस्या तिथि के दिन गंगा नदी में स्नान करने से और स्नान करने के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी जी की पूजा करने से घर में सुख समृद्धि शांति और खुशहाली आती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या तिथि के दिन काले तिल वस्त्र धन और अन्य का दान करने से आपके ऊपर भगवान श्री हरि विष्णु जी के साथ-साथ पितरों का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। अमावस्या तिथि के दिन स्नान करने के बाद पितरों का तर्पण करने से आपके पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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फागुन अमावस्या पूजा विधि
- अमावस्या तिथि के दिन आप सुबह शुरू होते से पहले उठकर गंगा जी में स्नान करें अगर गंगा जी में नहीं कर सकते तो आप नहाने वाले पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और साफ कपड़े पहन कर व्रत का संकल्प ले।
- अब आप घर की और मंदिर की साफ सफाई करें और इसके बाद आप दीपक जलाकर पूजा सामग्री जैसे की दीपक घी फूल अक्षत धूप कपूर फल मिठाई काले तिल जल पत्र एकत्रित करें।
- सभी पूजा सामग्री एकत्रित करने के बाद आप भगवान विष्णु और शिव जी की पूजा करें और पूजा से पहले ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का नाम जप करें।
- अब आपको भगवान शिव जी की पूजा करनी है और ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करके भगवान शिव जी को फूल चढ़कर दीपक जलाएं और फल अर्पित करें।
- अब आप जल में काले तिल मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों की शांति के लिए तर्पण करें।
- अमावस्या तिथि के दिन दान का बहुत ही विशेष महत्व होता है इसलिए आप अपनी श्रद्धा अनुसार जरूरतमंद लोगों को अन्न वस्त्र तिलकुट गाय को चारा और वस्त्र दान करें।
- अब आपके पूरे दिन फलाहार व्रत का पालन करना है इस दौरान आप केवल फलाहार का ही सेवन करें और मन में किसी भी तरह के अशुद्ध विचार न आने दे।
- आज शाम के वक्त पीपल के नीचे दीपक जलाएं और भगवान हनुमान जी को सरसों का तेल का दीपक अर्पित करें।